अच्छे ग्रेड पाने के लिए इस्तेमाल हो रही दवाईयां

आज की दा हिंदु में एक अच्छा सा ऐडिटोरियल सुबह देख रहा था –सर्व शिक्षा अभियान के बारे में लिखा गया था कि यह जो एक नियम बन गया है कि किसी को पांचवी कक्षा तक फेल ही नहीं करना …ऐसे में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का स्तर बहुत नीचे गिर गया है। अगर आप भी इस संपादकीय लेख को देखेंगे तो आपको भी लगेगा कि उस में बातें ठीक ही कही गई हैं।

चलिए बच्चों के स्कूल के ग्रेड की बात चली है तो मैं आपसे एक खबर ही शेयर कर लूं—बड़ा अजीब सा लगा यह न्यूज़ देख कर। न्यू-यार्क टाइम्स पर खबर छपी है…Risky Rise of Good-Grade Pill.

खबर अच्छी खासी लंबी है..मैं तो पहला पन्ना पढ़ कर ही ऊब सा गया ….इसलिये यह पोस्ट लिखने लग गया।

जब भी यह बच्चों के स्कूल के ग्रेड-व्रेड सुधारने की बात चलती है तो मुझे यहां की अखबारों में दिखने वाले वे विज्ञापन ध्यान में आ जाते हैं जिन में ये दावा किया गया होता है कि इन्हें पढ़ने से स्मरण-शक्ति बढ़ जाती है, एकाग्रता भी बहुत बढ़ जाती है …और भी कईं तरह के वायदे………..लेकिन सब के सब बोगस, पब्लिक को बेवकूफ़ बनाने की बातें।

हां तो जिस खबर की मैं बात कर रहा था वह यह है कि अमेरिका के स्कूली बच्चे अपने ग्रेड को बेहतर करने के लिये कुछ दवाईयों का इस्तेमाल करते हैं.. इन्हें खाने से ये बच्चे रात में जागे रहते हैं और पढ़ाई में उन की एकाग्रता बढ़ जाती है। लेकिन लफड़ा इन दवाईयों का यह है कि ये इस काम के लिये नहीं बनीं हैं —इन का इस्तेमाल डाक्टरों द्वारा –ADHD(Attention deficit hyperactivity disorder) जैसे मरीज़ों का इलाज करने के लिये किया जाता है।

इन दवाईयों का नाम है – amphetamines and methylphenidate. वहां पर ऐसा तो है नहीं कि कोई किसी भी कैमिस्ट से कोई भी दवाई खरीद कर लेनी शुरू कर दे। इस न्यूज़ में बताया गया है कि इन दवाईयों को हासिल करने के लिये अमेरिकी स्टूडेंट्स मानसिक तौर पर बीमार होने का नाटक करते हैं और ऐसा ड्रामा करते हैं जैसे कि उस बीमारी के लक्षण इन में मौजूद हैं ….और फिर डाक्टर इन्हें वे दवाईयां लेने की सलाह दे देता है।

और कुछ सीनीयर छात्र भी ये दवाईयां अपने जूनियर छात्रों को बेचते हैं।

लफड़ा इन दवाईयों का सब से बड़ा यह भी है कि इन्हें लेने वाले छात्र देर-सवेर अन्य प्रकार के नशों के चक्कर में पड़ जाते हैं और तरह तरह के मादक-पदार्थों का व्यसन इन्हें लग जाता है।

खबर का लिंक मैंने ऊपर दे दिया है, अगर चाहें तो पढ़ सकते हैं …वैसे पहला पन्ना ही पढ़ लेंगे तो भी चलेगा। लेकिन चिंता की बात यह है कि हम हर काम में अमेरिका जैसे देशों को नकल करने का बहाना ढूंढते हैं ….अगर हमारे युवा छात्रों ने भी रात रात भर जागने के लिए इन दवाईयों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया तो बड़ा अनर्थ हो जायेगा। यहां तो वैसे ही युवावर्ग तरह तरह के नशे की चपेट में आता जा रहा है।

इसलिए हमें चाहिए कि इस तरह की खबरों के बारे में बच्चों को सचेत करें और ऐसी दवाईयों के दुष्परिणामों के बारे में भी अकसर चर्चा करते रहा करें। आप का क्या ख्याल है? — मुझे पता इसलिये नहीं लगेगा कि आपने फीडबैक न देने की कसम खाई है ….बिल्कुल वैसे …. जैसे कि मैंने गूगल सर्च-ईंजन के लिये लिखने की  की ठान रखी है।

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