ऐंटीबॉयोटिक दवाईयों से संबंधित खतरे की घंटी अभी भी सुन लें….

अभी अभी मेरी नज़र एक चाईनीज़ वेबसाइट की एक स्टोरी पर पड़ी कि वहां पर किस तरह से ऐंटीबॉयोटिक दवाईयों का दुरूपयोग हो रहा है और किस तरह से वहां इस मुसीबत पर शिकंजा कसने हेतु कायदे-कानून बनाए जा रहे हैं। इसे पढ़ते हुये मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे भारत की भी कहानी है, इस मामले में हमारे हालात कुछ ज़्यादा बढ़िया नहीं है।

कितने अरसे से सुन रहे हैं कि ऐंटीबॉयोटिक दवाईयां अब पुरानी बीमारियों पर काम करना बंद किए जा रही हैं, लेकिन स्थिति जैसी की तैसी बनी हुई है। नए नए ऐंटीबॉयोटिक्स को ढूंढ निकालने में –उन की रिसर्च पर इतना खर्च होता है कि पाठक कल्पना भी नहीं कर सकते।
मैं ऐंटीबॉयोटिक दवाईयों के बारे में खूब सुना, पढ़ा और समझा और केवल एक निष्कर्ष निकाला। जब तक एक आम मरीज या यूं कह लें कि ग्राहक नहीं जागेगा तब तक कुछ भी उम्मीद नहीं दिखाई देती।

आठ वर्ष पुराना मेरा एक लेख

कितने कानून बनाएंगे, और कितनी कढाई से उन का पालन हो पाएगा, कितने कैमिस्टों पर नियंत्रण हो पाएगा (क्या आप सब कुछ नहीं जानते), अस्पतालों की कितनी ऐंटीबॉयोटिक पालिसियां बनेंगी …और भी बहुत कुछ होता आ रहा है होता रहेगा लेकिन जब तक कैमिस्ट इस काम में सहयोग नहीं देंगे, मरीज़ इस गंभीर मुद्दे को समझने की कोशिश नहीं करते और बिना डाक्टरों के सहयोग के तो कुछ भी संभव नहीं है।

कुछ दिन पहले आमीर खान ने अपने टीवी शो सत्यमेव जयते के दौरान दवाईयों के गोरखधंधों की इतने बड़े प्लेटफार्म पर पोल खोलने की कोशिश की।

आज मैंने एक टॉपिक ऐसा उठा लिया है जिस पर चाहें तो एक किताब लिख दें …..लेकिन उससे भी क्या होगा, जिस तरह से ऐंटीबॉयोटिक दवाईयां डाक्टरों के मना करने पर भी अपनी मनमरजी से खाई जा रही है, देख कर दुःख होता है….उधर कुछ कैमिस्ट बस अपनी जेबें ठूंसने में लगे हुए हैं। ठूंस लो यार …..शायद कभी तो जेब के साथ साथ पेट भी भर जाए।

मुद्दा तो बहुत बड़ा है …लेकिन कुछ अहम् बातें कर के विराम लेता हूं…..कभी भी अपनी मरजी से या कैमिस्ट की सलाह से ऐंटीबॉयोटिक दवाईयां खरीद कर खानी शुरू न कर दें …..डाक्टर अपने मरीज़ों की सारी खबर रखता है, केवल उसे ही पता है कि मरीज़ को क्या ऐंटीबॉयोटिक दवाई चाहिए, कौन सी चाहिए, कितनी डोज़ चाहिए, उस के संभावित दुष्परिणामों को उस के फायदों से संतुलित कर के रखना, कितने दिन ये दवाईयां लेनी हैं, कोई साइड इफैक्ट होने पर क्या करना है….अनेकों अनेकों ऐसी बातें …कितनों का उल्लेख करें।

दूसरी बात यह कि कभी भी कैमिस्ट से इस तरह की दवाई लें तो उस का बिल अवश्य लें —इस में झिझक न करें क्योंकि नकली, घटिया किस्म की ऐंटीबॉयोटिक दवाईयां बाज़ार में भरी पड़ी हैं …क्योंकि कुछ लोगों को आप की सेहत की बिल्कुल चिंता नहीं है, आप को ही सचेत रहना होगा।

कभी भी कैमिस्ट के पास जाकर यह मत कहें कि मुझे यह यह तकलीफ़ है, कुछ ऐंटीबॉयोटिक दवा दे दें…..यह पढ़े लिखों वाली बात नहीं है।
अपनी मरजी से इन दवाईयों की खुराक को न तो घटाएं बढ़ाएं और न ही इसे कितने दिनों तक लेना है, इस में अपनी इच्छा घुसाने की चेष्टा करें। संभवतः आप का चिकित्सक यह काम हज़ारों-लाखों लोगों के ऊपर कर चुका है …इसलिए उसे ही अपना काम करने दें।

यह जो मैं नीचे उस चाइनीज़ न्यूज़ का लिंक दे रहा हूं—उस में साफ़ साफ़ लिखा है कि हालात इस कद्र बिगड़ चुके हैं कि यौन जनित रोग जैसे कि गोनोरिया के लिए कारगर ऐंटीबॉयोटिक ही नहीं रहा। यह तो केवल एक उदाहरण है …. बर्फ़ के पहाड़ का मात्र एक शीर्ष बिंदु है —what you call tip of the iceberg!

और एक बात का ध्यान आ रहा है …. हमने अगर कांटों से बचना है तो सारे संसार में चटाई बिछाने से बेहतर क्या यह नहीं है कि हम स्वयं ही जूते पहन लें।

प्रेरणा — Crackdown on antibiotic abuse stepped up

कहीं आप की सेहत न बिगाड़ दें ऐंटीबॉयोटिक दवाईयां

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