ईश्वर दामिनी की आत्मा को शांति प्रदान करे

कल रात सोने से पहले ही सिंगापुर से निराशाजनक खबरे ं आ रही थीं .. आज सुबह सामूहिक बलात्कार की पीडि़ता के बारे में सुन कर मन बेहद दुःखी है। मुझे लगता है कि इन तेरह दिनों में उस की हालत पर हर भारतीय रोज़ाना रोया होगा …. अगर उस के आंसू नहीं भी टपके तो भी मन ही मन रोया तो होगा।

घटना के बारे में सोचता हूं … यार रात के केवल नौ-साढ़े नौ बजे ..दिल्ली जैसे शहर का मुनिरका एरिया ..एक टीनएजर लड़का एक 23 वर्ष की लड़की एवं उस के मित्र को बस में आने के लिए आमंत्रित करता है …कौन ऐसी कल्पना कर सकता है कि ऐसे में अगले आध-पौने घंटे में इन के साथ क्या होने वाला है।

मैं इतने दिन यही सोचता रहा कि इस अभागी लड़की की जगह कोई भी दूसरी लड़की हो सकती थी। एक बार और भी है कि दिल्ली के कुछ थ्री-व्हीलर वाले इतने अक्खड़ किस्म के हैं कि वे वहीं जाते हैं जहां उन को जाना पसंद है…. उन की यह दादागिरी, बस में काले शीशे लगाने वालों की बदमाशी और शायद उस से भी ऊपर उन्हें न उतरवाने वालों की भूमिका पर सवालिया निशान लगाती हैं ….

दामिनी के बारे में सुन कर मन बेहद दुःखी है…. जिस तरह से भारत की यह बेटी इलाज के दौरान साहस दिखा रही थी उस के दिन में कईं बार आस बंधती थी…. लेकिन आज तो सारे देश को ऐसा झटका लगा है कि ……………ऐसे लग रहा है कि अपने परिवार का ही एक सदस्य चला गया…..ऐसा इस लिए भी लग रहा है कि इस देश की प्रत्येक बहन-बेटी सहजता से अपने आप को उस पीड़िता से आइडैंटीफाई कर रही है।

हर आम आदमी की यही मजबूरियां हैं ….. वह किसी न किसी की दादागिरी सहता ही चला जाता है।

अब उन छः युवकों की बात करें … बस, यही उम्मीद है कि उन्हें कुछ इस तरह की सजा दी जाए और बहुत जल्दी दी जाए ताकि आगे से कोइ भी इस तरह का क्राइम करने की कल्पना मात्र से ही कांप उठे। अंडकोष निकालने की बात हो रही थी….मौत की सजा देने की बात हो रही है … हाथ पांव काटने की बात हो रही है ……..कुछ भी हो लेकिन ऐसी उदाहरण पेश हो कि सभी भावी बलात्कारियों में डर पैदा हो।

अभी मैं एनडीटीवी इंडिया देख रहा हूं ….जिस पर ट्विट्र संदेश भी दिखाए जा रहे हैं ….विजय माल्या ने कहा कि हम नहीं जानते तुम कौन हो, तुम्हारा नाम क्या था, लेकिन तुम हम सब में से ही एक थी………….कितना सही कहा माल्या ने।

बस इतना  ही कहना चाहता हूं कि ये जो आजकल वीभत्स किस्म के यौन अत्याचार बढ़ रहे हैं ..इस के पोर्नोग्राफी बहुत हद तक जिम्मेदार है। आज के कुछ युवा जितनी सहजता से ये सब कुछ अपने मोबाईलों पर एवं अन्य उपकरणों पर देखते हैं और आपस में इन का आदान प्रदान करते हैं वह भी उन्हें भड़काने का काम करता है। कल देख रहा था किसी चेनल पर हिंदी फिल्मी के आइटम सांग्स पर चर्चा चल रही थी ….. वह तो है ही, लेकिन यह पोर्नोग्राफी, इस का कुछ करना होगा………..

तो क्या आप को कभी लगता है कि पोर्नोग्राफी को कोई नियम बना कर कंट्रोल किया जा सकता है … मुझे तो नहीं लगता, कभी भी नहीं लगा……जब तक हमारे बच्चों के संस्कार बचपन से ही सही नहीं होंगे, हम उन्हें अच्छे, महांपुरूषों की संगति (सतसंग) आदि से नहीं जोड़ेंगे, कुछ नहीं होने वाला………………….भावी पी़ड़ी को सोच बदलनी होगी ….(please dont call it moral policing!!!)

न तो इस बार किसी को क्रिसमिस की बधाई देने की इच्छा हुई और अब न ही नये साल की बधाई देने की  ही इच्छा होगी……………कृपया मुझे भी नववर्ष की शुभेच्छा को कोई संदेश न भेजे।

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