मतलब तो गिरते हुए को थाम लेने से है….

आज सुबह मैं एक सतसंग में बैठा हुआ था …जब एक भक्त की बारी आई तो उस ने प्रार्थना से भरा एक गीत गाना शुरू किया …लगभग १००० लोगों का समूह उसे बड़ी तन्मयता से सुन रहा था। अभी उसे बोलते कुछ सैकेंड ही हुए थे कि मेरा ध्यान उस भक्त, भक्तिगीत या भजन की बजाए कहीं अटक गया………..जानना चाहेंगे क्या मेरा मन कहां अटक गया।

तो मेरा मन अटक गया उस धुन पर जिस की तरज पर वह भजन गाया जा रहा था….. गीत का तो मुझे ध्यान न रहा …कुछ समय की मशक्कत के बाद मैंने उस फिल्मी गीत को ढूंढ ही लिया …. वहीं बैठे बैठे ध्यान आ गया उस गीत का ..,समझौता गमों से कर लो, ज़िंदगी में गम भी मिलते हैं, पतझड़ आते ही रहते हैं……..बेहद सुंदर गीत….

बचपन में इस गीत को सुनते थे क्योंकि कोई और कोई विक्लप नहीं था…रेडियो पे बज रहा है तो उसे बंद कर देंगे तो आखिर करेंगे क्या, इसलिए बहुत बार यह गीत बजता रहता था…. लेिकन जो भी हो इस का संगीत अच्छा लगता था, बाद में धीरे धीरे जैसे जैसे ज़िंदगी के थपेड़े पड़ने शुरू हुए इस गीत के मायने भी समझ में आने लगे।

आज यह आलम है कि उस सतसंग में भक्तिगीत को भूल कर मैं इसे से याद करने में लग गया।

वहां सतसंग में बैठा मैं सोच रहा था कि यार यह क्या, बैठा यहां हूं और याद उस फिल्मी गीत को कर रहा हूं …लेकिन मुझे कभी भी किसी तरह का काम करने में अपराध -बोध हुआ ही नहीं …. इस में देखा जाए तो है ही क्या, वह बंदा जो सतसंग में इस गीत की तर्ज़ पर भक्तिगीत गा रहा था वह उस सतसंग भवन में उपस्थित लोगों की रूह खुश कर रहा था, उन को विश्वास, अकीदा, भरोसा इस ईश्वर-प्रभु में पक्का कर रहा था, उन के ढोलते हुए मन को थामने जैसा काम ही कर रहा था.

चलिए अब देखते हैं कि इस फिल्मी गीत ने क्या काम किया इतने सालों में ………इस ने भी किसी भी भक्तिगीत से कम तो किसी कीमत पर नहीं, शायद उस से ज़्यादा ही काम कर दिया होगा, पिछले ३०-४० वर्षों से लाखों-करोड़ों लोग का मन हल्का कर के ……………कौन जाने देश के किस कौने में किस जगह पर टूटी खटिया पर पसरे हुए कितने लोगों को विविध भारती या आल इंडिया रेडियो की उर्दू सर्विस पर अचानक बजने वाले इस सुंदर गीत ने कितनों को उन के  अंधकार में रोशनी की एक किरण दिखाई होगी…….. यह मैं विचार ही नहीं कर रहा , मैं इस पर शत-प्रतिशत विश्वास करता हूं।

और एक बात ….कहीं सुना था कि भक्तिगीत फिल्मों के गानों की धुनों पर नहीं होने चाहिए ……मैं नहीं मानता, शायद यह फोटो चिपका ले फेवीकोल जैसे आइटम सांग्स के लिए बात ठीक हो , लेकिन अगर इस सुंदर से फिल्मी गीत (जिस को मैं नीचे एम्बैड कर रहा हूं)… की धुन पर भक्तिगीत कोई गा ही रहा है तो उस में किसे आपत्ति हो सकती है …….यार, वो आप के मन को ही तो ठीक कर रहा है, चाहे कान सीधे पकड़ो या घुमा कर ………….मतलब तो गिरते हुए को थोड़ा थाम लेने से ही तो है………………

भई अपनी तो रूह हो गई है खुश इस पुराने बिछड़े गीत को इतने बरसों के बाद सुन कर …….मैं तो इसे शाम तक कईं बार सुनूंगा तो ही चैन पाऊंगा …..जब तक कि कोई अन्य संस्मरण यादों के झरोखों से झांकने न लगेगा…………..

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