शेल्टर होम्स की महिलाओं का ही एचआईव्ही टैस्ट क्यों?

7 सितंबर 2012 की अमर उजाला में छपी खबर

आज सुबह जब मैं अमर उजाला अखबार देख रहा था तो यह खबर देख कर बड़ा अजीब सा लगा … शेल्टर होम्स की महिलाओं का होगा एचआईव्ही टेस्ट।

ऐसा है ना… कभी इस तरह की खबर सुनी नहीं कि फलां फलां ग्रुप का एचआईव्ही टैस्ट किया जायेगा… इस खबर के बारे में आप का क्या ख्याल है?

एचआईव्ही टैस्ट की अहम् शर्त ही यह है कि यह स्वैच्छिक होना चाहिए … और उस की पहले प्री-टैस्ट काउंसिलिंग होनी चाहिए।

एक बात तो है कि रोहतक के अपना घर वालों ने कम से कम सारे देश को तो हिला कर रख दिया… किस तरह से वहां पर कुछ लोग दरिंदगी करते रहे … किसी को बख्शा नहीं गया… जहां तक पाठकों की कल्पना जा सकती है वह सब कुछ वहां होता रहा।

पता नहीं मुझे तो नहीं लगता कि जिस तरह से शेल्टर होम्स में महिलाओं के एचआईव्ही टैस्ट की बात इस खबर में मैंने देखी है ..क्या उस के बाद उन टैस्ट रिपोर्टों की गोपनीयता को सुनिश्चित किया जा सकेगा, यह एक गंभीर मुद्दा है।

बातें तो इस पोस्ट में बहुत सी लिखी जा सकती हैं, लेकिन मैं लिखना नहीं चाहता, जो महिलाओं शेल्टर होम्स में रहती हैं वे अकसर बेसहारा, घरेलू हिंसा की शिकार, मानसिक रूप से बीमार, परित्यक्त्त और अनाथ होने की वजह से वलनर्बेल ग्रुप में आती ही हैं … चाहे हम मानें या न मानें, मीडिया जो किसी समाज का आईना होता है …हमें इन की हालत की सही तस्वीर तो दिखाता ही रहता है…आखिर उस का काम ही यही है …बेजुबान की जुबान…

सवाल मेरा अपनी जगह पर कायम है – आखिर इन्हीं का ही एचआईव्ही टैस्ट कयों ?

क्या सुधि पाठक इस के बारे में कुछ प्रकाश डालने का कष्ट करेंगे ?

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घर में स्वयं ही एच.आई.व्ही टैस्ट करने का फंडा

लगभग एक वर्ष पहले अमेरिकी लोगों की एच आई व्ही टैस्टिंग के परिणामों से संबंधित मेरा  एक लेख था … जिस का एक अंश नीचे दे रहा हूं ..

अमेरिका में सितंबर 2007 से सितंबर 2010 तक 27 लाख लोगों की एचआईव्ही जांच की गई – जिन में से एक प्रतिशत से थोड़ा ऊपर लगभग 29503 लोगों को एचआईव्ही से ग्रस्त पाया गया। इन में से 18000 लोग तो ऐसे थे जिन्हें अपने एचआईव्ही पॉज़िटिव होने का पता ही नहीं था। और इन 29000 लोगों में से लगभग 72प्रतिशत पुरूष थे।

अमेरिका में लगभग 12 लाख लोग एचआईव्ही से ग्रस्त हैं जिन में लगभग 20 प्रतिशत लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें यह रोग है। और अहम् बात यह है कि वहां पर हर वर्ष जो एचआईव्ही के संक्रमण के नये केस, लगभग 56000 प्रतिवर्ष, पाये जाते हैं उन में से ज़्यादातर उन लोगों के कारण ही होते हैं जिन्हें अपने एचआईव्ही स्टेट्स का पता ही नहीं होता।
अब  समाचार यह है कि घर की प्राईव्हेसी में ही एच आई व्ही टैस्ट करने की किट बस मार्कीट में मिलनी शुरू होने ही वाली है। इसे किसी भी कैमिस्ट की दुकान से खरीदा जा सकेगा और घर में स्वयं ही इस से व्यक्ति अपने एच आई व्ही स्टेट्स का पता लगा पायेगा। इस टैस्ट का नाम है …ओरा-क्विक इन-होम एच आई व्ही टैस्ट (OraQuick In-Home HIV Test) और अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस को रिक्मैंड किया है।
विशेषज्ञों की राय में यह टैस्ट सुरक्षित होने के साथ साथ इफैक्टिव भी है। वैसे टैस्ट तो कुछ पहले भी आए थे जिन्हें कोई घर पर कर सकता था लेकिन उन के लिये रक्त का नमूना चाहिए होता था लेकिन इस टैस्ट के लिये खून नहीं चाहिए …इस के लिये कॉटन के एक स्वैब को मसूड़ों पर बस घुमा देना होता है …बस सैंपल ले लिया गया ….और बीस मिनटों में इस का रिज़ल्ट पता चल जाता है।
यह टैस्ट पॉज़िटिव केसों के लिये 93 प्रतिशत एक्यूरेट है और निगेटिव केसों के लिये यह 99.8 प्रतिशत एक्यूरेट है। इस का मतलब है कि इस टैस्ट से ऐसा हो सकता है कि कुछ पॉज़िटिव केस (लगभग सात प्रतिशत) मिस हो जाएं ….अर्थात् इन एचआईव्ही पॉज़िटिव केसों को यह निगेटिव बता दे लेकिन किसी निगेटिव को पॉज़िटिव बताना इस टैस्ट के लिए लगभग नामुमकिन सा ही है …
फिर भी विशेषज्ञों का यह कहना है कि इस किट के ऊपर बड़े शब्दों में यह चेतावनी भी दी जाए कि इस से मिलने वाले परिणाम गल्त हो सकते हैं….. जैसा कि हम इस से ऊपर वाले पैरा में देख चुके हैं। लेकिन वह भी कोई इतना बड़ा इश्यू कहां है क्योंकि बाद में रक्त की जांच से किसी के एच आई व्ही स्टेट्स की पुष्टि की जा सकती है।
नि-संदेह इस टैस्ट से जुड़े मुद्दे चाहे कोई भी हों, इतना तो तय है कि इस टैस्ट के आने से लोगों को विशेषकर जिन का हाई-रिस्क बिहेवियर रहा है… उन्हें अपना एच आई व्ही स्टेट्स जानने की उत्सुकता बढ़ेगी और अगर वह यह काम अपने घर की प्राईव्हेसी में कर पाएंगे तो यकीनन इस टैस्ट का लाभ बहुत से लोग उठा पाएंगे।

Further reading : Over-the-counter HIV tests backed by US Panel