पंजाब के स्कूली बच्चों का इलाज बिल्कुल मुफ्त

पंजाब सरकार की तरफ़ से छपा विज्ञापन

आज सुबह कहीं बैठे हुए जब पंजाब केसरी अखबार के पन्ने पलट रहा था तो एक सरकारी विज्ञापन पर नज़र रूक गई। यह अलग सा विज्ञापन लगा –स्कूली बच्चों के मुफ्त इलाज के बारे में पंजाब सरकार द्वारा यह विज्ञापन जारी किया गया था।

इस विज्ञापन में बताया गया था कि पंजाब के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चे हृदय-रोग, कैंसर, थैलेसीमिया जैसे रोगों के लिए मुफ्त इलाज पा सकेंगे। खबर पढ़ कर बहुत अच्छा लगा।

सुबह उस विज्ञापन के नीचे लिखे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की तरफ़ मेरा ध्यान नहीं गया, मैंने यही सोचा कि यह पंजाब सरकार की अनूठी पहल है। लेकिन जब शाम को मैं गूगल अंकल से इस तरह की स्कीम के बारे में पूछ रहा था तो पता चला कि स्कूली बच्चों के इस तरह के इलाज के लिए यह स्कीम नेशनल रूरल हैल्थ मिशन के अंतर्गत अन्य कईं राज्यों में भी चलाई जा रही है।

मुझे इस स्कीम के बारे में जान कर बहुत अच्छा लगा …इस तरह की बीमारियों का इलाज अच्छा खासा महंगा होता है और सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अकसर जिस आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं उन के अभिभावकों के लिए अपने बलबूते इन के इस तरह के इलाज की व्यवस्था कर पाना कहां संभव होता है।

लेकिन अब इस तरह की स्कीम के आ जाने से इन बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के मां-बाप को तो राहत मिलेगी ही, इन बच्चों को भी जीवन दान मिलेगा।

और एक विशेष बात इस विज्ञापन से पता चली कि इलाज के लिये बड़े बड़े अस्पतालों जैसे कि पी जी आई, चंडीगढ़, क्रिश्चियन मैडीकल कालेज, लुधियाना, दयानंद मैडीकल कालेज,लुधियाना …और चंडीगढ़के आसपास के कुछ अच्छे निजि कारपोरेट अस्पतालों को भी इन बच्चों के इलाज के लिये चुना गया है।

इस विज्ञापन में इन बीमारियों के लक्षण भी दिये गये थे ताकि अभिभावकों का मार्ग-दर्शन हो सके। किसी तरह की जानकारी के लिए इस विज्ञापन के नीचे संबंधित अधिकारी का फोन नंबर भी दिया गया था।

उत्सुकता वश मैंने पंजाब के सेहत विभाग की अभी वेबसाइट खोली और नेशनल रूरल हैल्थ मिशन के लिंक पर क्लिक किया और स्कूल हैल्थ प्रोग्राम के बारे में पढ़ा तो यह जानकारी मिली की साइट पर पंजाब के हरेक जिले में जिन बच्चों का इस स्कीम के अंतर्गत हृदय रोग की सर्जरी हुई है, उस का पूर्ण ब्यौरा वेबसाइट पर दिया गया था…साथ में उन का पूरा पता और मोबाइल नंबर भी दिया गया था।

मुझ इस विज्ञापन को देख कर अपना पुराना समय याद आ गया — 1991 में हमारी नईं नईं जाब लगी थी …ई एस आई कारपोरेशन के दिल्ली के मुख्य अस्पताल में। हमारा बेटा 2-3 महीने का था, उसे नियमित जांच के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ के पास लेकर गये तो उसे यह शक हुआ कि उस के हृदय में सुराख है … बड़ी चिंता हो गई—बहरहाल उन्होंने हमे जी बी पंत अस्पताल जाकर उस का ईको-टैस्ट करवाने के लिए कहा….यह टैस्ट हमने दो-तीन दिन में करवा लिया….वह टैस्ट करने वाले डाक्टर ने बताया कि ऩहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।

मुझे अच्छी तरह से याद है कि उन दो तीन दिनों में एक बार तो यह चिंता भी हो गई कि कैसे हो पायेगा आप्रेशन के लिए इतनी मोटी रकम का जुगाड़ — नौकरी नईं नईं थी – कोई बैंक बेलेंस नहीं ….और इतना भी पता नहीं था कि सरकारी नौकरी में परिवार के इलाज का खर्च विभाग द्वारा वहन किया जाता है, लेकिन शायद उस समय यह नियम था कि पहले तो स्वयं ही खर्च करना पड़ता था।

यह बात मैंने इस लिए लिखी है कि बीमारी के समय हवा निकलते देर नहीं लगती … हाथ पैर फूल जाते हैं और बच्चों की जिन बीमारियों का रूरल हैल्थ मिशन प्रोग्राम के अंतर्गत फ्री इलाज करने की बात हो रही है, उन में तो खर्च ही बहुत आता है।

अच्छा लगा यह विज्ञापन देख कर —लेकिन फिर ध्यान लखनऊ में हुई इस एऩएचआऱएम के करोडों के घोटालों की तरफ़ भी चला गया – अब अगर सरकारें इतने नेक काम के लिये पैसे भेज रही है…..क्या इस पैसे में भी चोंच मारने वालों को आप दरिंदे नहीं कहेंगे। लेकिन हुआ क्या, कितने लोगों ने अपनी जानें गंवा दी, कितनों ने नौकरी …..लेकिन फिर भी यह लालच की दाद-खुजली कहां मिटने का नाम लेती है!

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