बालों की सेहत जुड़ी है मस्त रहने से

आज दोपहर में थोड़ा सिर भारी सा हो रहा था …अकसर ऐसे सुस्त समय में जो होता है… टीवी के रिमोट से चल रही थी तो छेड़छाड़… लेकिन अचानक मैं ठहर गया। दूरदर्शन पर प्रोग्राम आ रहा था— मेरी बात। मैंने तो इस कार्यक्रम को बीच में ही से देखना शुरू किया था, लेकिन जैसे अकसर होता है मेरी दौड़ अकसर दूरदर्शन,  लोकसभा, राज्यसभा, डी डी भारती जैसे चैनलों पर खत्म हो जाती है। इस के जो कारण हैं वे इस पोस्ट के दायरे में नहीं आते, फिर कभी इस की चर्चा करेंगे।

हां, तो मेरी बात कार्यक्रम में चर्चा चल रही थी …बालों के बारे में। हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब, फिटनैस एक्सपर्ट डा शिखा शर्मा और अपने चुटकीले अंदाज़ में तड़का लगाने वाले लोकप्रिय कवि प्रो अशोक चक्रधर स्टूडियो में आये दर्शकों का एवं दूर गांव से फोन पर प्रश्न पूछने वालों की जिज्ञासा शांत कर रहे थे।

बहुत उपयोगी लगा यह कार्यक्रम। इन तीनों मेहमानों ने मिल कर बिल्कुल सरल सटीक भाषा में आम आदमी के मन में घर कर चुकी बालों से संबंधित भ्रांतियों को बाहर निकालने का भरसक प्रयास किया।

हबीब और शिखा शर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि अगर बालों की सेहत अच्छी चाहिए तो सब से पहले तो हमें अपनी जीवनशैली को देखना होगा… सादा खाएं, पौष्टिक एवं संतुलित आहार लें, व्यायाम करें, योगाभ्यास करें और सब से ज़रूरी है खुश रहें। विशेषज्ञों ने कहा कि जब आप खुश रहेंगे तो आप के बाल भी खुश रहेंगे। मानसिक तनाव से बाल झड़ने का सिलसिला गति पकड़ता है।

हेयर-ट्रांसप्लांट करने के बारे में डा शिखा ने बताया कि अगर किसी को यह इलाज करवाना ही है तो उसे हेयर क्लीनिक का चुनाव करते समय बहुत सावधानी बरतनी होगी, वरना बचे खुचे बालों को भी उड़ते देर नहीं लगेगी।

औसतन हर सिर पर एक लाख बाल होते हैं और रोज़ाना लगभग एक सौ बाल झड़ते है…यह बिल्कुल सामान्य है।

कईं कंपनियां जो गुमराह करने वाले दावे करती हैं कि उन के तेल से घने काले बाल उग आएंगे, इन की पोल भी इन विशेषज्ञों ने खोल कर रख दी … उन्होंने बताया कि इस तरह के तेलों आदि में ऐसा कुछ भी तो नहीं होता।

आज कर बालों को कलर करने का मुद्दा बड़ा गर्माया रहा …विशेषज्ञों ने साफ़ साफ़ कह दिया कि अगर बाल कलर करने ही हैं तो किसी अच्छी कंपनी के ब्रांडेड हेयर कलर ही इस्तेमाल करें। उन्होंने बड़ी बेबाकी से कह दिया कि हेयर कलर कोई भी हो, बाल तो वह आप के शुष्क करता ही है। वैसे उन्होंने मेंहदी जैसे  प्राकृतिक तरीकों की भी बहुत सराहना की।

हबीब ने बताया कि लोगों में एक यह बड़ा भ्रम है कि एक बार बाल कटवाने से फिर से आने वाले बाल बड़े घने और स्वस्थ आयेंगे  …इस का कोई वैज्ञानिक पहलू नहीं है, और न ही ऐसा होता है।

डा शिखा ने यह भी अच्छा बताया कि मां प्रकृति में रिपेयर करने की क्षमता अपरम्पार है… उन्होंने कहा कि हम लोग देखते हैं कि कैंसर के कुछ रोगी जिन्हें रेडियोथैरेपी अथवा किमोथैरेपी दी जाती है उन के सारे के सारे बाल झड़ जाते हैं लेकिन दो-तीन वर्षों के बाद फिर से इतने घने और स्वस्थ बाल आ जाते हैं कि देख कर ताजुब्ब होता है।

अच्छा लगा यह प्रोग्राम देखकर — यह हर शनिवार को बाद दोपहर प्रसारित किया जाता है। मेरी बात में हर बार एक अलग बात चर्चा का विषय होती है।

हां, तो उस के बाद मैं कुछ करने में व्यस्त हो गया क्योंकि मुझे लोकसभा चैनल पर शनिवार को शाम छः से सात बजे तक हैल्दी इंडिया कार्यक्रम देखना होता है…लेकिन आज जैसे ही छः बजे चैनल को ऑन किया तो सभी विशेषज्ञ नमस्कार कर के अनुमति लेने की मुद्रा में दिखे …..इस का समय पांच से छः बजे हो गया है, कोई बात नहीं आगे से ध्यान रखूंगा। उस के बाद मैं यह पोस्ट लिखने लग गया। लिखिएगा, मेरा यह प्रयास कैसा लगा?

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